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Thursday, 25 March 2010

ज़रा दूरियां।

ज़रा दूरियाँ बढ़ जाने दो
ज़रा दिल को दूर जाने दो
जब प्यार नहीं दिलों में
तो क्या होना है रहके इनका पास-पास?

ज़रा यादों से मिट जाने दो
ज़रा सपनों से हट जाने दो
जब एहसास नहीं सीने में
तो क्या होना है रहके मेरा धड़कनों के पास?

ज़िन्दगी का झूट मैंने
सच मान लिया था
तेरे बातों को मैंने
प्यार मान लिया था
अब जाके सच का सामना हुआ है
कि मैंने क्या किया था।

ज़रा आँखों से अश्क बह जाने दो
ज़रा जी भर के मुझे रो लेने दो
जब ये किस्मत है मेरी
तो क्या होना है रखके इसे पास-पास?

1 comment:

  1. प्यार में जब दूरियाँ और मजबूरी होती है तो इसी तरहा दूर होते है दो प्यार करने वाले।

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