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Saturday, 8 February 2014

मासूम



1.
          वह खामोशी से सड़क की ओर ताके जा रहा था। सड़क पर भारी भीड़ और गाड़ियों की आवा-जाही बंद थी। स्ट्रेचर पर एक लाश उठाकर ले जाया जा रहा था। किसकी थी ये लाश, कोई जानता न था। बस सब जानते थे कि सड़क के किनारे भीख मांगती हुई वह लड़की एकाएक एक काले रंग की बुलेरो के नीचे आ गई।
टे.....टे......टे.......ट्चाइइई....च...च...चचच..... आह।
अरे अरे देखो क्या हुआ!!??”
लगता है कोई नीचे आ गया है।
पी...पी...पी...
Oh! My god. Poor fellow
Darling what you have done?
“Do you think, I purposely did it.”
अब पुलिस हमें पकड़ेगी।
हमें जल्दी यहाँ से निकलना चाहिए।
Oh no, लोगों की भीड़ जम चुकी है। अब निकलना मुश्किल है।
मैं डेड के फोन लगाती हूँ।
ट्राफिक हवलदार चलो बाहर निकलो।
ड्राइवर Yeah man, um sorry, its very unfortunately..Um sorry….sorry.”
ट्राफिक हवलदार अंग्रेजी नहीं बोलने का, एक्सीडेंट क्या, अभी थाने चलने का।
ड्राइवर You don’t know me man.मेरे डेड एक बिजनेस टाइकून है। तुम जैसे को एक बार में खरीद लेंगे।
ट्राफिक हवलदार ऐं ऐं ..... ऑन ड्यूटी पुलिस वाले को धमकी देता है। रिश्वत दिखाता है। हवालात में जब जाएगा तब सारा टशन बाहर निकल जाएगा।
ड्राइवर अरे हवलदार जी easy, आप मेरी बात नहीं समझ रहे हो.......मैं इस accident के लिए पे करने को तैयार हूँ, इसे हॉस्पिटल भी ले जाऊँगा। बस आप केस को रफ़ा-दफ़ा कर दो। मुझे मत ले जाओ। मुझे एक जरूरी काम से जाना था इसलिए मैं इतनी जल्दी में था। मैं मानता हूँ कि मुझसे गलती हुई है। .....घुमकर ....He is not listening me.”
ट्राफिक हवलदार जास्ती पकाने का नई। लॉकअप में अपना सारा जरूरी काम करना समझा। ओ मेडम तुमको भी बोलना पड़ेगा क्या। ए ....गाड़ी को Custody में ले रे।

2.
          रास्ता साफ था आज। पहले जैसी भागम-भाग गाड़ियों की। सड़क के उस पार से इस पार तक सब साफ-साफ दिखता। पर उस भीड़-भाड़, गाड़ियों की भागम-भाग में रोने की आवाज़ अजीब सी लगती है। उस मासूम की आँखों से आँसूओं की धारा बह रही है। भूख और अकेलेपन ने बेचारे को डर में डूबो दिया है। रोते बिलखते वह हर किसी की तरफ हाथ उठाता, मगर अपनी दुनियाँ में मस्त लोगों में से किसे फुर्सत थी उसकी ओर देखने की। ट्राफिक के हवलदारों में से जब कोई उसे देखता तो दुतकार देता।

3.
          फिर सड़क पर वही भीड़ थी। सड़क के किनारे कचरे के पास एक मासूम बेसुध सा पड़ा था। चेहरे पर मख्खियाँ भिन-भिना रही थी और उसे एक कुत्ता चाट रहा था। मीडिया समेत, स्थानीय समाज सेवी संस्थाएँ और आते जाते हर कोई उस मासूम पर तरस खाते जा रहे है। प्रशासन अधिकारी तथा पुलिस लोगों की भीड़ और मीडिया के सवालों से जूझ रहे थे। कोई-कोई बीच में कह उठता कि किसने इस मासूम को पैदा करके न पाल सकने की मजबूरी में कचरे में फेंक दिया। मीडिया को आज बहुत दिनों के बाद फिल्मी सितारों की छींक और वारड्रोब मॉल्फंकशन से वक्त मिला है उस मासूम पर अपना केमरा टिकाने का। सभी मीडिया वाले एक सूर में उस मासूम के करीबी बन रहे थे और यह जता रहे थे कि किसने उसे पहले देखा और किसके चैनेल पर उसकी तसवीर सबसे पहले जारी की गयी। कही-कही पर तो कुछ बुद्धिजीवियों ने सरकार के कमजोर न्याय एवं कानून व्यवस्था के विरोध में जूलूस निकाल लिया। कही अग्रगणी युवाओं से जर्नलिस्ट सवाल-जवाब कर रहे है। सब अपने लिए क्रेडिट जुटाने में लगे है पर कोई ये नहीं देखता कि वह मासूम सांसे भी ले रहा है या नहीं।
नमस्कार में एम. सी. डी न्यूज, नमस्कार में जी. के न्यूज से शैलजा, हाय दिस इज़ क्यू टी.वी एण्ड आई एम लारा............
नमस्कार में मीना मल्लिक एफ. टी. वी से.....आइए मैं आपको उस मासूम के पास ले चलती हूँ जिसे उसकी माँ जन्म देकर पाल न सकने की मजबूरी में कचरे के पास छोड़कर चली गयी। मैं आपको बता दू कि सबसे पहले हमारे ही चैनल पर इस मासूम की तसवीर जारी की गयी है।
स्टूडियों से मीना ....मीना......क्या आप मझे सुन पा रही है?”
जी....रुबिना...
मीना ये कब की घटना है और क्या कहना है वहाँ के लोगों का? कब देखा उन्होंने इस बच्चे को?”
रूबिना मैं आपको बता दू कि ये मासूम आज तीन दिनों से यही कचरे के पास पड़ा है। दो-तीन लोगों ने इसे रोते हुए, बिलखते हुए देखा था और आज सुबह ये बेहोश पाया गया।
इस बच्चे के माँ के बारे में कुछ पता लग पाया है कौन है?”
इसके बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं लगाया जा सका है। कुछ लोगों का कहना है कि पाँच दिन पहले यही इसी स्थान पर एक औरत की दुर्घटना में मौत हो गयी थी, वही औरत इस बच्चे की माँ थी
तो मीना। इतने दिनों से प्रशासन क्या कर रहा था। जब यह दुर्घटना हुई थी तब ये बच्चा, हमें बताया गया है कि ये बच्चा भी वही पर था अपनी माँ की लाश के पास। तब क्या प्रशासन ने उस वक्त इस बच्चे की जिम्मेदारी नहीं ली, और क्यों किसी ने तब उसे नहीं देखा, क्यों सबने उसके बेहोश होने तक का इंतज़ार किया?”
रूबिना, प्रशासन ने अब जाकर ज़िम्मेदारी ले ली है।
इस मीडिया के शोर-गुल के चक्कर में वह मासूम अभी भी इस इंतज़ार में था कि कोई उसे आकर सम्भाल ले उसे त्राण दे दे। तभी एक एम्बुलेन्स आती है और उसे ले जाती है।

4.
टी. वी पर ब्रेकिंग न्यूज़ में मासूम की तस्वीर आती है। वह आई.सी.यू  में है और बड़े-बड़े अक्षरों में मासूम पुकार रहा है, मुझे इस अनोखी दुनियाँ से बुला लो, भगवान!”


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