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Friday, 4 June 2010

सवाल नज़रों का...........

उसने मुझे
बड़े गौर से
एक बार देखा,
उसकी नज़रों में
कई सवाल थे,
मेरी नज़रे भी
सवालों से भरी थी,
उसकी नज़रों के सवालों
को जानना चाहती थी,
पर जवाब किसी के
पास नहीं था,
सवाल ये नज़रो का था।

2 comments:

  1. शीर्षक से ही भावनाओं की गहराई का एह्सास होता है।

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  2. Thank you Manoj ji. Mujhe aap sabke bichaaro ka intazaar rahega.

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