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Saturday, 9 April 2011

भ्रष्ट नेता और अफ्सर शाहो के नाम..............

मुझे अपनी बुराईयों की
इतनी आदत हो चुकी है
कि
एक भी छोड़ दू तो
जीना दुश्वार सा हो जाता है
भ्रष्टाचारी, ढोंगी जैसे नाम
अगर मेरे नाम से न जुड़े
तो
नाम ही बेकार सा लगता है।

प्रपंच, षड़्यंत्र और केवल राजनीति
थोड़ी सी बेकार कोशिशें
भ्रष्टाचार के खिलाफ
आम आदमी के आशाओं पर पानी फेरना
पत्रकारों के लिए बेकार बयानबाजी
यही है आज मेरी छवि
मै नेता हुँ
हाँ हाँ जनाब मैं नेता हुँ
और ये सब मैं न करू
तो नेतागिरि करना ही बकवास सा लगता है।

रिश्वत न लू अगर
बेईमानी न करू
अपनी ताकत का मनमाना इस्तेमाल न करू
तो
आई.ए.एस होने पर मुझे धिक्कार है
पढ़ाई-लिखाई इसीलिए तो की थी मैंने
विद्या पायी थी तो इसी के लिए
माँ-बाप ने इसीलिए दिया था आशीर्वाद मुझे
कि जा बेटा अफ्सरशाही कर अपनी तरह की
लूट जनता को
नहीं तो तू हमारा बेटा मेरा

हम भ्रष्टाचार और आतंकवाद
से लड़ने में सक्षम हो गए है
कथन है बस नाम के
बड़ी हस्तियों के
तभी तो भ्रष्टाचारी को जेल
आतंकी को फाँसी देने में
हो रही है देरी

पता नहीं कब मौका मिलेगा मुझे
कि मैं देश को ही खा जाऊँ
वरना
मेरे जन प्रतिनिधि होने पर ही धिक्कार है, धिक्कार है